उजड़ते घर ......

                                                                                                photo source- internet

   उजड़ती जा रही है, 
संस्कृति मेरे उत्तराखंड की 
और उजड़ते जा रहे है 
वो खूबसूरत घर। 
जिनके आंगन में गूँजा करती थी 
नन्हे बचपन की किलकारियां,
और हुक्का लिए बैठा करता था 
अनुभवों भरा  बुढ़ापा,
इनके तीरों में ही लोग 
रख के जाया करते थे ,
वो खुशियों के मीठे- मीठे 
लडडू। 
इन्ही तिबारों  के पीछे कभी 
मेरा भी नन्हा बचपन 
कहा करता था 
लुक्कू। 




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